परिचयABOUT
आचार्य कुलदीप भारद्वाज
वैदिक ज्योतिषाचार्य — जिनके लिए ज्योतिष व्यवसाय से पहले परंपरा है।

आचार्य जी का जन्म एक वैदिक ब्राह्मण परिवार में हुआ, जहाँ कुंडली बनाना और पढ़ना किसी पेशे की नहीं — परंपरा की बात थी। वर्षों तक उन्होंने यह विद्या परिवार, मित्रों और जान-पहचान के परिवारों के लिए निःशुल्क साधी। (नमूना जीवनी — वास्तविक कथा आचार्य जी से बातचीत के बाद लिखी जाएगी।)
गणित के अध्यापक होने के नाते अंक और गणना उनका स्वभाव है — और यही उनका ज्योतिष भी है: गणना पहले, कथन बाद में। जो कुंडली में स्पष्ट न दिखे, वह कहा नहीं जाता। जो दिखे, वह बिना घुमाए कहा जाता है।
दशकों में जिन परिवारों की कुंडलियाँ उनके पास रहीं, उन्होंने एक ही बात बार-बार कही — “जो कहा, वो हुआ।” यही वाक्य आज इस नाम की पहचान है।
- परंपरा
- वैदिक ब्राह्मण परिवार — पूजा-पाठ और शास्त्र घर की शिक्षा रही
- पद्धति
- पराशर पद्धति की वैदिक कुंडली-गणना; दशा-गोचर का संयुक्त विचार
- नियम
- बिना डर, बिना झूठे वादे — उपाय उतना ही, जितना आवश्यक
- भाषा
- परामर्श हिंदी में; रिपोर्ट हिंदी एवं English दोनों में
परखने का सबसे सरल तरीका — स्वयं बात कीजिए।