॥ शुभम् भवतु ॥
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जो प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं, उनके सीधे उत्तर — सरल हिंदी में। (नमूना लेख)
हर तीसरी कुंडली में 'मांगलिक' बताकर डराया जाता है। जानिए मंगल दोष वास्तव में कब बनता है, कब स्वतः भंग होता है, और कब उपाय की आवश्यकता ही नहीं।
राहु-केतु के बीच सिमटे ग्रह = काल सर्प? इतना सरल नहीं। जानिए वास्तविक पहचान, प्रकार, और कब यह योग हानि नहीं — उन्नति भी देता है।
सप्तम भाव, शुक्र-गुरु और दशाओं का संयोग — विवाह का समय कैसे निकाला जाता है, सरल भाषा में।
गलत रत्न लाभ नहीं — हानि करता है। रत्न-निर्धारण की सही विधि, और कब रत्न की आवश्यकता ही नहीं होती।